मनुष्य की लार तथा लार ग्रन्थियाँ (Saliva and Salivary Glands) : परिभाषा, प्रकार|hindi


मनुष्य की लार तथा लार ग्रन्थियाँ (Saliva and Salivary Glands) : परिभाषा, प्रकार
मनुष्य की लार तथा लार ग्रन्थियाँ (Saliva and Salivary Glands) : परिभाषा, प्रकार|hindi

हमारी मुखगुहिका लार (saliva) के कारण सदा गीली बनी रहती है। लार दाँतों, जिह्वा तथा मुखगुहिका की सफाई करती रहती है। भोजन करते समय लार की मात्रा बढ़ जाती है और यह भोजन को चिकनाहट देती, इसे घुलाती तथा इसके रासायनिक विबन्धन को प्रारम्भ करती है।

लार ग्रन्थियाँ (Salivary Glands) 
लार एक जल-सदृश सीरमी तरल (serous fluid) तथा एक चिपचिपे श्लेष्म (mucus) का मिश्रण होती है। यह दो प्रकार की लार ग्रन्थियों द्वारा स्रावित होती है-

(A) लघु या सहायक (minor or accessory) लार ग्रन्थियाँ : ये होंठों, कपोलों, तालु तथा जिह्वा पर ढकी श्लेष्मिका (mucosa) में उपस्थित अनेक छोटी-छोटी सीरमी तथा श्लेष्मिक ग्रन्थियाँ होती हैं जो श्लेष्मिक कला को नम बनाए रखने हेतु लार की थोड़ी-थोड़ी मात्रा का सीधे मुखगुहा में सदैव स्रावण करती रहती हैं।

(B) प्रधान (major or main) लार ग्रन्थियाँ : लार की अधिकांश मात्रा का स्रावण तीन जोड़ी बड़ी लार ग्रन्थियाँ करती हैं जो मुखगुहिका के बाहर स्थित होती हैं, परन्तु अपनी वाहिकाओं (ducts) द्वारा अपने स्रावित तरल को मुखगुहा में मुक्त करती हैं। ये ग्रन्थियाँ बहुकोशिकीय एवं पिण्डकीय (lobulated) होती हैं तथा मुखगुहिका की श्लेष्मिका की एपिथीलियम के वलन से बनती हैं। ये निम्नलिखित होती हैं—
  1. अधोजिह्वा या सबलिंग्वल ग्रन्थियाँ (Sub lingual Glands) : ये मुखगुहा के अगले भाग में इसके तल की श्लेष्मिका के नीचे स्थित सबसे छोटी एवं सँकरी ग्रन्थियाँ होती हैं जो श्लेष्म का स्रावण करती हैं। प्रत्येक ग्रन्थि से कई महीन वाहिनियाँ निकलकर जिह्वा संधायक के पास खुलती हैं।
  2. कर्णमूल या पैरोटिड ग्रन्थियाँ (Parotid Glands) : ये कपोलों में, कर्णपल्लवों के नीचे और आगे की ओर स्थित पीली-सी एवं चपटी, सबसे बड़ी लार ग्रन्थियाँ होती हैं। प्रत्येक की लम्बी एवं मोटी वाहिनी को स्टेन्सन्स नलिका (Stenson's duct) कहते हैं। यह अपनी ओर के द्वितीय ऊपरी चर्वण (मोलर) दन्त के सामने बेस्टीब्यूल में एक अंकुर पर खुलती है। ये ग्रन्थियाँ मुख्यतः एक जलीय अर्थात् सीरमी तरल का स्रावण करती हैं। मनुष्य में मुख्यतः बच्चों में, गलसुआ (mumps) नामक रोग एक वाइरस के संक्रमण के कारण इन्हीं ग्रन्थियों के फूल जाने से होता है। पुरुषों में इसके कारण वृषणों (testes) में सूजन और जलन हो जाती है।
  3. अधोहनु अर्थात् सबमैन्डिबुलर ग्रन्थियाँ (Submandibular Glands) : ये निचले जबड़े के पश्च भाग में जीभ के इधर-उधर श्लेष्म का स्रावण करने वाली मध्यम माप की लार ग्रन्थियाँ होती हैं। इनकी लम्बी वाहिनियाँ व्हारटन्स नलिकाएँ (Wharton's ducts) कहलाती हैं। ये अपनी-अपनी ओर के निचले कृन्तक (इन्साइजर) दन्तों के पीछे, जीभ संधायक के इधर-उधर खुलती हैं।

मनुष्य की लार तथा लार ग्रन्थियाँ (Saliva and Salivary Glands) : परिभाषा, प्रकार|hindi


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