पैरामीशियम में पोषण (Nutrition in Paramecium)
भोजन (Food)-
पैरामीशियम भी अमीबा की तरह ही, होलोज़ोइक (holozoic) विधि से भोजन करता है। इसका भोजन मुख्य रूप से बैक्टीरिया होते हैं, जो उस पानी में तैरते रहते हैं जिसमें यह रहता है।
ऐसा अनुमान लगाया गया है कि एक अकेला पैरामिशियम 24 घंटों में 20 लाख से 50 लाख तक Bacillus coli को खा जाता है।
यह छोटे प्रोटोजोआ, बैक्टीरिया के अलावा एककोशिकीय पौधों (जैसे शैवाल, डायटम, यीस्ट आदि) और जानवरों व सब्जियों के छोटे-छोटे टुकड़ों को भी खाता है। यह उन चीज़ों को छोड़ देता है जिन्हें पचाना मुश्किल होता है, और कुछ खास तरह के भोजन को ही खाता है।
एक तरह से पैरामिशिया बैक्टीरिया के अस्तित्व के लिए भी फ़ायदेमंद होते हैं, क्योंकि यदि पैरामीशियम उन्हें खाएंगे तो वे काफी तेजी से प्रजनन कर सकते हैं जिससे अत्यधिक बैक्टीरिया होने के कारण उनका अपना अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता हैं।
पैरामीशियम की एक प्रजाति, P. bursaria, काफी दिलचस्प होती है क्योंकि यह हरे रंग की होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसके एंडोप्लाज़्म में अनेक एककोशिकीय शैवाल—सहजीवी Zoochlorella—मौजूद होते हैं। इस प्रकार, यह Zoochlorella द्वारा निर्मित खाद्य पदार्थों पर ही निर्भर रहते हैं और लंबे समय तक होलोफ़ाइटिक (holophytically) रूप से जीवित रह सकते हैं। भोजन की कमी के दौरान पैरामीशियम अपने ही ज़ूक्लोरेला को भी पचा सकता है और उनके बिना भी अनिश्चित काल तक जीवित रह सकता है।
पैरामीशियम में भोजन ग्रहण करने की विधि (Feeding mechanism)-
पैरामीशियम तैरकर उन स्थानों तक पहुँचता है, जहाँ उसे अपना भोजन मिल सके। भोजन पकड़ने के लिए इसके अंग, अमीबा और यूग्लीना की तुलना में कहीं अधिक विशेष होते हैं।
यह भोजन को मुख गुहा के तल पर स्थित एक निश्चित 'कोशिका-मुख' (cell mouth) या 'साइटोस्टोम' (cytostome) द्वारा ग्रहण करता है।
इसके oral groove के सीलिया की लगातार हिलते डुलते रहते हैं। सीलिया के हिलने-डुलने वाली गति से भोजन के कणों से युक्त पानी की एक धारा को वेस्टिब्यूल (vestibule) की ओर धकेलती जाती है। जिसके बाद वेस्टिब्यूल के सीलिया-पथ (ciliary tracts) भोजन के कणों को मुख गुहा के अंदर भेजते हैं।
मास्ट (1947) के अनुसार, पानी की धारा के साथ कई प्रकार के कण वेस्टिब्यूल में आ सकते हैं, लेकिन केवल चुने हुए कण ही मुख गुहा के अंदर जाते हैं। बाकी कणों को अंदर जाने से रोक दिया जाता है और उन्हें बाहर निकाल दिया जाता है। इस प्रकार, यह ciliate एक चयनात्मक भक्षक (selective feeder) होता है जो सिर्फ चुनिंदा भोजन कणों को ही अंदर जाने देता है।
पैरामीशियम के शरीर का वह मार्ग जिसके साथ सिलियरी क्रिया द्वारा चुने हुए भोजन के कण आगे बढ़ाती है चयन मार्ग (selection path) कहलाता है; जबकि वह मार्ग, जिसके साथ अवांछित भोजन के कण वेस्टिब्यूल के बाहर निकाले जाते हैं, अस्वीकरण मार्ग (rejection path) कहलाता है।
मुख गुहा (buccal cavity) की झिल्लियों (membranelles) के सीलिया की गति चुने हुए भोजन के कणों को साइटोसोम से होते हुए कोशिका-ग्रसनी (cell gullet) या साइटोफैरिनक्स में पहुँचाती है। अब भोजन धीरे-धीरे साइटोफैरिनक्स (cytopharynx) के निचले हिस्से में एक झिल्लीदार थैली (vesicle) के रूप में जमा हो जाता है, जो बाद में टूटकर एक 'food vacuole' बन जाता है। भोजन की उपलब्धता और खाने की गति के आधार पर, 1 से 5 मिनट के अंदर एक और food vacuole बन सकता है।
पाचन (Digestion)-
हर food vacuole में खाने के कण होते हैं, जो पानी की एक पतली परत से घिरे होते हैं। पैरामीशियम में एंडोप्लाज़्म की तेज़ और अनियमित गति नहीं होती है, बल्कि एंडोप्लाज़्म की धीमी, धारा-जैसी गति होती है जिसके द्वारा भोजन रिक्तिका (food vacuole) शरीर के चारों ओर एक लगभग निश्चित मार्ग पर घुमाई जाती है। इस प्रक्रिया को 'cyclosis' कहते हैं।
इस प्रकार, एक अच्छी तरह से पोषित पैरामिशियम के एंडोप्लाज़्म में कई रिक्तिकाओं को एक निश्चित दिशा में घूमते हुए देखा जा सकता है। ये रिक्तिकाएँ पहले पीछे की ओर, फिर आगे और अबोरल (aborally) दिशा में, और पुनः पीछे की ओर तथा ओरल दिशा में cytopyge तक ले जाई जाती हैं। इस यात्रा के दौरान भोजन का पाचन और स्वांगीकरण (assimilation) होता है।
पाचक एंजाइम (प्रोटीएज़, कार्बोहाइड्रेज़, लाइपेज़) लाइसोसोम द्वारा खाद्य रिक्तिकाओं में स्रावित किए जाते हैं, जिनका आंतरिक वातावरण पहले क्षारीय, फिर अम्लीय और बाद में पुनः क्षारीय हो जाता है। इसे 'रेड कांगो' डाई (Red Kongo' dye) की सहायता से प्रदर्शित किया जा सकता है। भोजन के पचे हुए उत्पाद कोशिकाद्रव्य में विसरित हो जाते हैं।
उत्सर्जन (Egestion)-
जैसे-जैसे पाचन और अवशोषण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, रिक्तिका (vacuole) धीरे-धीरे छोटी होती जाती है। अंत में, बिना पचा हुआ बचा हुआ पदार्थ शरीर से एक निश्चित गुदा-स्थान या 'साइटोपाइज' (cytopyge) के माध्यम से बाहर निकाल दिया जाता है। cytopyge एक संभावित गुदा की तरह कार्य करता है, क्योंकि बिना पचा हुआ पदार्थ हमेशा इसी स्थान से बाहर निकाला जाता है।
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