पौधों में ऑक्सी-श्वसन क्रिया (Aerobic Respiration in Plants)
सभी जीव चाहे वह पौधे हो, सूक्ष्मजीव हो या जीव जंतु हो उन्हें अपनी दैनिक गतिविधियों जैसे वृद्धि, गति, जल तथा खनिज के अवशोषण आदि के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा पौधों में विभिन्न प्रकार के कार्बनिक पदार्थों में संचित रहती है। जैविक कार्यों के लिए आवश्यक यह ऊर्जा कार्बनिक पदार्थों के ऑक्सीकरण के द्वारा मुक्त होती है। कार्बनिक पदार्थों के विघटन से ऊर्जा, कार्बन डाई ऑक्साइड तथा जल का उत्पादन होता है। सभी जीवों में यह क्रिया श्वसन द्वारा संपन्न होती है। श्वसन दो प्रकार के होते हैं - ऑक्सी श्वसन (Aerobic Respiration) तथा अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic Respiration)
पौधों में ऑक्सी श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। ऐसी क्रिया करने वाले पौधों को ऑक्सी पौधे कहते हैं। इस क्रिया में खाद्य पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण हो जाता है जिसके फलस्वरूप कार्बन डाई ऑक्साइड तथा जल बनते हैं और ऊर्जा मुक्त होती है। पौधों में इस क्रिया को दिखाने के लिए और यह सिद्ध करने के लिए कि ऑक्सी श्वसन की क्रिया के दौरान कार्बन डाई ऑक्साइड मुक्त होती है हम एक प्रयोग करेंगे। इस प्रयोग के दौरान हम पौधों में होने वाली इस क्रिया को और अच्छी तरह से समझ सकते हैं। प्रयोग करने की विस्तृत प्रक्रिया नीचे दी गई है-
प्रयोग : सिद्ध करना कि पौधों में ऑक्सी-श्वसन क्रिया में CO₂ गैस उत्पन्न होती है। (To prove that CO2 is evolved in aerobic respiration)
इस प्रयोग को करने के लिए हमें कुछ सामग्रियों की आवश्यकता होती हैं जैसे कुछ बेलजार, पौधे, काला कपड़ा, अंकुरित बीज, प्याज, आलू, चूषण पम्प, U-नली, KOH विलयन, चूने का पानी आदि।
सबसे पहले एक बेलजार (B) में कुछ अंकुरित बीज, आलू अथवा प्याज रखा जाता है (यदि कोई हरा पौधा रखा जाये तब बेलजार को काले कपड़े से ढकना आवश्यक होगा)। इसके बाद बेलजार के दोनों ओर चूने के पानी से भरी दो बोतलें A व C जोड़ दी जाती हैं।
इसके बाद हम इनमें से एक बोतल C का सम्बन्ध KOH युक्त U-नली से तथा दूसरी बोतल A का सम्बन्ध एक चूषण पम्प (suction pump) से करते है। बोतल A व C, बेलजार B तथा U-नली से जैसा कि ऊपर चित्र में दिखाया गया है उसके अनुसार एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं तथा पूरे उपकरण को वायु-अवरुद्ध (air-tight) रखा जाता है। चूषण पम्प (suction pump) खोलने से उपकरण से वायु का खिंचाव होता है जिससे वायु U-नली में रखे KOH से होती हुई C बोतल में प्रवेश करती है। वायु में उपस्थित CO₂, KOH द्वारा अवशोषित कर ली जाती है। बोतल C में चूने के पानी का दूधिया न होना इसका प्रमाण है।
कुछ समय पश्चात् हम देखते हैं कि बोतल A में रखा चूने का पानी दूधिया हो जाता है। इससे यह सिद्ध होता है कि अंकुरित बीज श्वसन में CO₂ गैस निकालते हैं जिससे बोतल A का चूने का पानी दूधिया हो जाता है।
निम्न प्रयोग द्वारा यह सिद्ध होता है कि पौधों में ऑक्सी-श्वसन क्रिया के दौरान कार्बन डाई ऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है।
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