पर्णरन्ध्र की संरचना (Structure of Stomata)
पत्ती तथा अन्य हरे, मुलायम, वायवीय भागों की बाह्य त्वचा में विशेष प्रकार के छिद्र, पर्ण रन्ध्र होते हैं। इनको बनाने वाली दो कोशिकाएँ, रक्षक कोशिकाएँ (guard cells) अन्य बाह्य त्वचीय कोशिकाओं की अपेक्षा भिन्न (आकार सेम के बीज की तरह) तथा हरितलवकयुक्त होती हैं। इनकी बाहरी भित्ति पतली तथा भीतरी (छिद्र की ओर) भित्ति मोटी होती है। रक्षक कोशिकाओं के चारों ओर बाह्य त्वचा की कोशिकाओं को सहायक या अतिरिक्त कोशिकाएँ कहते हैं।
पर्ण रन्ध्र (स्टोमेटा) के कार्य (Functions of Stomata)
पर्ण रन्ध्र या स्टोमेटा (stomata) के दो प्रमुख कार्य हैं-
(क) वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) - ऊतकों के अतिरिक्त जल का निष्कासन जल वाष्प के रूप में पर्ण रन्ध्रों द्वारा होता है।
(ख) वात-विनिमय (Gaseous exchange) - कार्बन डाइऑक्साइड तथा ऑक्सीजन आदि गैसों का आदान-प्रदान, पर्ण रन्ध्रों के द्वारा होता है। इस प्रकार ये श्वसन तथा प्रकाश संश्लेषण में सहायता करते हैं।
कुछ महत्त्वपूर्ण याद रखने योग्य बिन्दु
★ पत्ती - पर्वसन्धियों से विकसित पार्श्वीय चपटी, हरे रंग की संरचनाएँ होती हैं।
★ पत्ती के भाग - पर्णाधार, पर्णवृन्त तथा पर्णफलक। पर्णाधार से लगी अतिरिक्त संरचना अनुपर्ण (stipule) कहलाती है।
★ अनुपर्ण - मुक्त पाश्र्वीय, संलग्न, अन्तरावृन्तक, ऑक्रिएट, पर्णिल, शल्कीय, कंटकीय या प्रतानी होते हैं।
★ पर्णाभ वृन्त - पर्णवृन्त (petiole) पत्ती सदृश संरचना में रूपान्तरित हो जाती है, उदाहरण ऑस्ट्रेलियन बबूल।
★ पर्णवृन्त रूपान्तरण - सपक्ष, प्रतानी, स्पन्जी (प्लवन) होती हैं।
★ शिराविन्यास (venation) - पत्ती में शिराओं (vein) की व्यवस्था होती है। शिराविन्यास मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है
(ⅰ) जालिकावत् (reticulate); जैसे-द्विबीजपत्री पत्ती में
(ii) समानान्तर (parallel); जैसे- एकबीजपत्री पत्ती में
★ पत्ती के प्रकार - सरल तथा संयुक्त। संयुक्त पत्ती में पर्ण फलक अनेक भागों में बँटा होता है। ये दो प्रकार की होती हैं-
(क) पिच्छाकार संयुक्त (Pinnate compound leaves) रहते हैं। इसमें रेकिस पर पर्णक लगे रहते हैं।
(ख) हस्ताकार संयुक्त (Palmate compound leaves) इसके सभी पर्णक पर्णवृन्त के एक बिन्दु पर लगे होते हैं।
★ पत्तियों के कार्य - प्रकाश संश्लेषण, वाष्पोत्सर्जन, गैस विनिमय पत्तियों के सामान्य कार्य हैं। कुछ पत्तियाँ अन्य कार्यों के लिए रूपान्तरित हो जाती हैं। पत्तियाँ प्रतान, कंटक या घट सदृश रचनाओं में बदल जाती हैं।
★ रन्ध्र - पत्तियों पर स्थित रन्ध्र दो रक्षक कोशिकाओं से घिरे रहते हैं। रक्षक कोशिकाओं की स्फीत दशा होने पर रन्ध्र खुल जाते हैं और श्लथ दशा होने पर बन्द हो जाते हैं।
★ प्रकाश संश्लेषण - पत्तियाँ खाद्य निर्माण के केन्द्र होती हैं। ये प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा भोजन निर्माण करती हैं। पौधों द्वारा तैयार भोज्य पदार्थों पर समस्त प्राणी जगत प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से निर्भर रहता है। प्रकाश संश्लेषण एक ऑक्सीकरण-अवकरण प्रक्रिया है।
★ पत्तियों की आन्तरिक संरचना के आधार पर पत्तियाँ पृष्ठाधारी या समद्विपाश्विक होती हैं। यह क्रमशः द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री पौधों की विशेषता होती है।
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