पौधों में फ्लोएम उभारण तथा अभारण (Loading and Unloading the Phloem)| in hindi


पौधों में फ्लोएम उभारण तथा अभारण (Loading and Unloading the Phloem) 

पौधों में फ्लोएम उभारण तथा अभारण (Loading and Unloading the Phloem)

मुन्च (Münch) परिकल्पना के मॉडल के माध्यम से फ्लोएम, विशेषरूप से चालनी नलिका (sieve tube) में भोजन आने के बाद उभारण तथा अभारण की गति दिखाई गयी है, जबकि चालनी नलिका स्वयं में न तो स्रोत (source) है और न ही अभिगम (sink) है बल्कि यह स्रोत व अभिगम के मध्य एक संयोजन (link) है। प्रश्न यह उठता है कि भोज्य पदार्थ किस प्रकार स्रोत से चालनी नलिकाओं में तथा वहाँ से अभिगम (sink) में जाते हैं। भोज्य-पदार्थों के स्रोत (source) से चालनी नलिकाओं में जाने को फ्लोएम उद्भारण (phloem loading) तथा वहाँ से अभिगम भागों में जाने को फ्लोएम अभारण (phloem unloading) कहते हैं। 


(i) फ्लोएम उभारण (Phloem Loading)

पत्ती की पर्णहरिमयुक्त कोशिकाओं (क्लोरेनकाइमा) में शर्करा का निर्माण होता है। यह शर्करा चालनी नलिकाओं में जाने से पहले समीप की अन्य कोशिकाओं में जाती है। यह स्थानान्तरण सिम्प्लास्ट (symplast) द्वारा होता है, अर्थात् कोशिकाओं के बीच सम्बन्धित जीवद्रव्यी तन्तुओं (plasmodesmata) के माध्यम से होता है। 

पर्णमध्यक की अन्य कोशिकाओं के बीच तथा सखि-कोशिकाओं (companion cells) चालनी नलिकाओं (sieve tubes) के बीच जीवद्रव्यी तन्तु बहुत ही कम या अनुपस्थित होते हैं। इसी कारण से वैज्ञानिक क्लोरेनकाइ‌मा तथा चालनी नलिकाओं के बीच शर्करा के स्थानान्तरण को एपोप्लास्ट (apoplast) अर्थात् कोशिका-भित्ति (cell wall) से होकर मानते हैं। इसकी पुष्टि विभिन्न परीक्षणों से की जा चुकी है। 

उदाहरण स्वरूप जब किसी पौधे में पत्तियों को प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया हेतु ¹⁴CO₂ दी जाती है तो यह ¹⁴C शीघ्र ही शर्करा में आ जाती है। इस रेडियोधर्मी शर्करा की उपस्थिति को क्लोरेनकाइमा के अतिरिक्त सखि-कोशिकाओं व चालनी नलिकाओं की कोशिका-भित्ति में भी देखा जा सकता है। चालनी नलिकाओं की कोशिका-भित्ति में शर्करा का उद्धारण सखि-कोशिकाओं (companion cells) द्वारा होता है।


फ्लोएम उद्भारण प्रक्रिया में चालनी नलिका की कोशिका कला (cell membrane) में उपस्थित एक H⁺ आयन वाहक तथा ATP, चालनी नलिका से प्रोटोन को बाहर पम्प करने में प्रयुक्त होते हैं। 

इस पम्पन क्रिया के कारण कोशिका कला पर प्रोटोन प्रवणता (proton gradient) उत्पन्न हो जाती है। इसमें कोशिका कला के बाहर H+ आयन की सबसे अधिक सान्द्रता होती है। विद्युतिक तटस्थता (electrical stability) बनाये रखने के लिये K+ आयन चालनी नलिका में जाते हैं इसी कारण से फ्लोएम रस (phloem sap) में K+ आयनों की अधिक मात्रा होती है। इसके बाद प्रोटोन पुनः H+ वाहक के साथ चालनी नलिका में विसरित हो जाते हैं और चालनी नलिका में शर्करा स्थानान्तरण को शक्ति प्रदान करते हैं। 

फ्लोएम उद्भारण सान्द्रण प्रवणता (concentration gradient) के विरुद्ध होता है क्योंकि क्लोरेनकाइमा कोशिकाओं में यह सान्द्रता 0.1-0.5 M जबकि एक पतली शिरा की चालनी नलिका में भी यह सान्द्रता 1M तक होती है। अतः फ्लोएम उद्भारण में ATP आवश्यक है, यही कारण है कि यदि पौधों को श्वसन विष (respiratory poison) जैसे सायनाइड के प्रभाव में रखा जाये तो फ्लोएम उद्भारण रुक जाता है और यदि चालनी नलिका में ATP दिया जाये तो फ्लोएम उद्भारण तीव्र हो जाता है। 

पौधों में फ्लोएम उभारण तथा अभारण दिखाते हुए लेबलयुक्त चित्र



(ii) फ्लोएम अभारण (Phloem Unloading)

चालनी नलिका से शर्करा तथा अन्य विलेय का अभारण जीवद्रव्यी तन्तुओं द्वारा (symplastically) या कोशिका-भित्ति के माध्यम से (apoplastically) हो सकता है। वर्धी भागों के वृद्धि कर रहे अभिगमों (sinks) जैसे जड़ तथा तरुण पत्तियों में फ्लोएम अभारण प्रायः जीवद्रव्यी तन्तुओं द्वारा होता है (सिम्प्लास्ट) जबकि अन्य अभिगमों में यह प्रायः कोशिका भित्ति के माध्यम से होता है (एपोप्लास्ट)। 

खाद्य पदार्थों के स्थानान्तरण के सम्बन्ध में निम्न तथ्य प्रमुख हैं- 

(a) यह क्रिया साधारण विसरण की अपेक्षा तीव्रता से होती है।

(b) स्थानान्तरण, चालनी नलिका अवयवों (sieve tube elements) द्वारा होता है।

(c) चालनी नलिकाओं के अवयव केवल चालनी पट (sieve plate) के छिद्रों द्वारा सम्बन्धित रहते हैं।

(d) स्थानान्तरण प्रक्रिया में ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो ATP से मिलती है।

(e) चालनी नलिकाओं से कुछ विशेष मृदूतक कोशिकाएँ सम्बन्धित रहती हैं, जिन्हें स्थानान्तरण कोशिकाएँ (transfer cells) कहा जाता है। इन कोशिकाओं की कोशिका-भित्ति व कला में भीतर की ओर अनेक अन्तःवलन (infoldings) होते हैं जो भोजन के सक्रिय परिवहन के लिये पृष्ठ क्षेत्र (surface area) बढ़ाते हैं। स्थानान्तरण कोशिकाएँ, जड़, संग्रह भागों तथा वृद्धि कर रहे प्ररोहों में पायी जाती हैं जहाँ पर ये भोजन के चालनी नलिकाओं से बाहर निकलकर उन कोशिकाओं में जाने में सहायक होती हैं जिनमें भोजन की आवश्यकता होती है।


खाद्य-पदार्थों के स्थानान्तरण की क्रिया को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक 

(1) प्रकाश (Light) - प्रकाश की उपस्थिति में भोज्य पदार्थों का निर्माण होता है। प्रकाश प्रखरता (light intensity) बढ़ने पर खाद्य-पदार्थों का सामान्यतया जड़ों की ओर स्थानान्तरण बढ़ जाता है। इसके विपरीत प्रकाश की कमी या अन्धकार खाद्य-पदार्थों के जड़ों से तनों की ओर स्थानान्तरण को प्रेरित करता है। 

(2) खनिजों की न्यूनता (Minerals deficiency) - खनिजों की न्यूनता खाद्य पदार्थों के स्थानान्तरण में प्रमुख कारक है। यदि बोरॉन (boron) तत्व की कमी हो जाये तो खाद्य पदार्थों की स्थानान्तरण क्रिया मन्द हो जाती है और यदि पौधों को अतिरिक्त बोरॉन दिया जाये तो फ्लोएम द्वारा भोजन स्थानान्तरण की दर में अप्रत्याशित वृद्धि हो जाती है। इसी प्रकार से पोटैशियम तत्व की कमी से भी स्थानान्तरण क्रिया मन्द (slow) हो जाती है, यह सम्भवतः इस कारण से है कि फ्लोएम उद्भारण में K+ आयन भी ग्रहण किये जाते हैं। 

(3) हॉर्मोन्स (Hormones) - कुछ ऐसे प्रमाण हैं जो खाद्य-पदार्थों के स्थानान्तरण प्रक्रिया पर हॉर्मोन्स के प्रभाव को सिद्ध करते हैं। सम्भवतः हॉर्मोन्स वृद्धि तथा उपापचयी क्रियाओं को प्रभावित करके ही खाद्य-पदार्थों के स्थानान्तरण का नियमन करते हैं। इन हॉर्मोन्स का फ्लोएम उद्भारण अथवा फ्लोएम अभारण पर सीधे कोई प्रभाव नहीं देखा गया है। 







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