सांपों का ज़हर (Snake venom): कार्य बनावट, प्रकार| in hindi


सांपों का ज़हर (Snake venom): कार्य बनावट, प्रकार

सांपों का ज़हर (Snake venom): कार्य बनावट, प्रकार| in hindi



सांप एक ऐसा reptile है जो दुनिया भर में पाए जाने वाले सबसे दिलचस्प सरीसृपों (reptiles) में से एक हैं। हालांकि बहुत से लोग सांपों के ज़हर से डरते हैं, लेकिन यह हमारे लिए यह जानना भी बहुत ज़रूरी है कि सांपों की बहुत कम प्रजातियां ही ज़हरीली होती हैं। सांप का ज़हर सिर्फ़ एक खतरनाक चीज़ नहीं होता है बल्कि यह एक कीमती प्राकृतिक संसाधन भी होता है जिससे वैज्ञानिक जान बचाने वाली दवाएं और एंटीवेनम (ज़हर का इलाज) बनाते है।

नीचे लेख में हम सांप का जहर क्या होता है, उसके प्रकार और उसकी बनावट के बारे में जानेंगे। हम यह भी जानेंगे कि सांप का जहर उसके शरीर में कैसे बनता है, उससे क्या नुकसान होते हैं और सांप के काटने पर क्या प्राथमिक उपचार देना चाहिए यह भी जानेंगे।  


सांप का ज़हर क्या है? (What is Snake Venom?)

सांप का ज़हर ज़हरीले सांपों की आंखों के पीछे मौजूद खास ज़हर ग्रंथियों (venom glands) द्वारा बनता है। जब सांप अपने शिकार को काटता है तो काटने के दौरान यह ज़हर खोखले या खांचेदार दांतों (fangs) के ज़रिए शिकार के शरीर में पहुँचाया जाता है।

सांप का ज़हर कई पदार्थों का एक जटिल मिश्रण होता है जिसमें प्रोटीन, एंजाइम, पेप्टाइड्स और अन्य जैविक रूप से सक्रिय पदार्थों शामिल होते हैं। अलग-अलग सांप अलग-अलग तरह का ज़हर बनाते हैं जो उनके शिकार और उनके वातावरण के आधार पर बनता है। 



सांप के ज़हर के मुख्य काम-

सांप अपने जहर का इस्तेमाल कई कार्यों के लिए करते हैं। उसके जहर के मुख्य कार्य इस प्रकार है -

  • अपने शिकार को मारना या उसे लकवाग्रस्त (paralyze) करना
  • पाचन में मदद करता है 
  • शिकारी जीवों से सांप की रक्षा करता है 


सांप के ज़हर की बनावट (Composition of Snake Venom)


सांप के ज़हर कई chemical components से मिलकर बना होता है जिनमें Proteins, Enzymes, Peptides, Toxins, Minerals, और Water शामिल होते हैं। ये तत्व मिलकर शिकार के शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर असर डालते हैं। 

Related article-

सांप के ज़हर के प्रकार (Types of Snake Venom)

सांप के ज़हर के कई प्रकार होते हैं। इन प्रकारों को आम तौर पर शिकार के शरीर पर उसके असर के आधार पर बांटा जाता है। इन प्रकारों का वर्णन इस प्रकार है -

1. न्यूरोटॉक्सिक ज़हर (Neurotoxic Venom)

न्यूरोटॉक्सिक ज़हर अपने नाम की तरह शिकार के नर्वस सिस्टम अर्थात तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। इस प्रकार जा विष मुख्य रूप से कोबरा, करैत, और कोरल स्नेक में पाया जाता है। इससे शिकार के शरीर पर निम्न असर देखने को मिलता है -

  • नर्व सिग्नल को रोकता है
  • मांसपेशियों में कमज़ोरी लाता है
  • बोलने में दिक्कत होती है 
  • सांस लेने में दिक्कत होतीहै 
  • लकवा (पैरालिसिस) होना 
  • गंभीर मामलों में सांस लेने में पूरी तरह रुकावट आ सकती है



2. हेमोटॉक्सिक ज़हर (Hemotoxic Venom)

यह ज़हर मुख्य रूप से शिकार के खून और खून की नसों पर असर करता है। यह विष मुख्य रूप से रसेल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर और पिट वाइपर में पाया जाता है। यह विष शिकार के शरीर पर निम्न असर दिखाता है-

  • यह लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) को नष्ट करता है
  • काटने के बाद बहुत ज़्यादा खून बहता है
  • यह खून का थक्का जमने से रोकता है
  • खून की नसों को नुकसान पहुंचाता है
  • सूजन और दर्द होता है



3. साइटोटॉक्सिक ज़हर (Cytotoxic Venom)

साइटोटॉक्सिक ज़हर शिकार के काटने वाली जगह के आस-पास के शरीर के ऊतकों (टिश्यू) को नष्ट कर देता है। यह विष मुख्य रूप से कुछ कोबरा और अफ़्रीकी स्पिटिंग कोबरा में पाया जाता है। विष के शरीर में प्रवेश करने के बाद निम्न असर दिखाई देता है -

  • शरीर में तेज़ दर्द
  • सूजन होना 
  • ऊतकों को नुकसान पहुंचना 
  • त्वचा पर घाव (अल्सर) होना 
  • कोशिकाओं की मौत (नेक्रोसिस) होना 



4. मायोटॉक्सिक ज़हर (Myotoxic Venom)

मायोटॉक्सिक ज़हर मांसपेशियों पर हमला करता है। यह विष मुख्य रूप से समुद्री सांपों और कुछ रैटलस्नेक में पाया जाता है। शरीर में प्रवेश करने पर यह निम्न असर दिखाता है -

  • मांसपेशियों में दर्द
  • मांसपेशियों में कमज़ोरी
  • मांसपेशियों के रेशों का टूटना
  • मांसपेशियों के प्रोटीन के निकलने से किडनी को नुकसान पहुंचना 




5. कार्डियोटॉक्सिक ज़हर (Cardiotoxic Venom)

कार्डियोटॉक्सिक ज़हर अपने नाम की तरह ही होता है जो शिकार के दिल पर असर करता है। कुछ कोबरा प्रजातियों में कार्डियोटॉक्सिक तत्व पाए जाते हैं। इसका शिकार के शरीर पर निम्न असर पड़ता है -
  • दिल की धड़कन का अनियमित होना
  • लो ब्लड प्रेशर होना 
  • दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचना 
  • गंभीर मामलों में हार्ट फेलियर होना 



6. मिश्रित ज़हर (Mixed Venom)

कई सांप ऐसा ज़हर बनाते हैं जिसमें एक से ज़्यादा तरह के टॉक्सिन होते हैं। कुछ सांपों में न्यूरोटॉक्सिक और साइटोटॉक्सिक दोनों तरह का ज़हर हो सकता है, जिससे नर्वस सिस्टम और शरीर के ऊतकों, दोनों को नुकसान पहुँचता है।


Related video-

सांप का ज़हर कैसे बनता है? (How is Snake Venom Produced?)


साँपों का ज़हर प्राकृतिक रूप से उनकी आंखों के पीछे मौजूद खास ज़हर ग्रंथियों (venom glands) के अंदर बनता है। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। इन चरणों का वर्णन इस प्रकार है -

  • ज़हर ग्रंथियां प्रोटीन और टॉक्सिन बनाती हैं।
  • यह ज़हर ग्रंथियों के अंदर जमा रहता है।
  • काटते समय, ज़हर ग्रंथि के आस-पास की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं।
  • ज़हर ज़हर की नलियों (venom ducts) से होकर गुज़रता है।
  • सांप के दांतों (fangs) के ज़रिए ज़हर शिकार के शरीर में पहुँचाया जाता है। 
  • ज़हर का इस्तेमाल होने के बाद, ग्रंथियां धीरे-धीरे और ज़हर बनाने लगती हैं।


सांप के ज़हर के नुकसान (Harmful Effects of Snake Venom)

ज़हरीले सांप के काटने के बाद तुरंत मेडिकल इलाज ज़रूरी है। सांप का ज़हर शिकार के शरीर पर बुरा असर दिखाता है जो इस इस प्रकार है -

  • बहुत ज़्यादा दर्द
  • सूजन
  • खून बहना
  • लकवा (पैरालिसिस)
  • मांसपेशियों को नुकसान
  • किडनी फेल होना
  • सांस लेने में तकलीफ़
  • झटका लगना 
  • इलाज न होने पर मौत 



सांप के काटने पर प्राथमिक उपचार 

सांप के काटने पर अस्पताल में दिया जाने वाला एंटीवेनम ही सांप के ज़हर के गंभीर असर का असरदार इलाज कर सकता है। अगर किसी को ज़हरीला सांप काट ले तो व्यक्ति को निम्न कार्य करने चाहिए -

  • शांत रहें।
  • सांप से दूर हट जाएं।
  • जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे हिलाएं-डुलाएं नहीं।
  • अंगूठी, ब्रेसलेट या टाइट कपड़े उतार दें।
  • तुरंत नज़दीकी अस्पताल पहुंचें।
  • घाव को काटें नहीं।
  • ज़हर को मुंह से चूसकर न निकालें।
  • बर्फ़ या केमिकल न लगाएं।
  • टाइट पट्टी तब तक न बांधें जब तक प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ़ ऐसा करने को न कहे।

सांप का ज़हर प्रकृति के सबसे जटिल बायोलॉजिकल पदार्थों में से एक है। सांप इसका इस्तेमाल शिकार पकड़ने और अपना बचाव करने में करता है, वहीं इसके जहर का उपयोग आधुनिक चिकित्सा में भी अहम भूमिका निभाता है। इसके जहर का इस्तेमाल कई तरह के एंटीवेनम बनाने में तथा कई दवाइयों को बनाने में किया जाता है। इसके द्वारा सांप  के व्यवहार को भी समझने में मदद मिलती है। 





No comments:

Post a Comment