जीवों के उत्सर्जन अंग(Excretory organs of organisms)
सभी जीवों में पाचन की क्रिया के बाद शरीर से उत्सर्जी पदार्थों को निकालने के लिए कुछ उत्सर्जी अंगों का इस्तेमाल होता है। इन अंगों के द्वारा शरीर से उत्सर्जी पदार्थ आसानी से बाहर निकाल दिए जाते हैं। सभी जीवों के उत्सर्जी अंग अलग अलग होते हैं। इन्हीं को विस्तार से नीचे बताया गया है -
1. अमीबा में उत्सर्जन संकुचनशील रसधानी (Contractile vacuole) के द्वारा होता है।
2. पैरामीशियम में उत्सर्जन संकुचनशील राजधानी (Contractile vacuole) के द्वारा होता है।
3. चपटे कृमि (Flatworms (Platyhelminthes)) का उत्सर्जन अंग ज्वाला कोशिकाएं (Flame cells (Protonephridia)) होती है।
4. केंचुए का उत्सर्जन अंग नेफ्रीडिया (Nephridia) होता है।
5. कीट जैसे - कॉकरोच का उत्सर्जन अंक मालपीघियन नलिकाएं (Malpighian tubules) तथा मलाशय होते हैं।
6. झींगा का उत्सर्जन अंग एंटेनल ग्रंथियां (Antennal glands) जिसे हरी ग्रंथियां (Green glands) भी कहा जाता है होती हैं।
7. मनुष्य में उत्सर्जन अंग वृक्क (मूत्र प्रणाली) (kideny (Urinary System)) होता है।
8. मछली में उत्सर्जन अंग वृक्क तथा गलफड़े होते हैं।
9. मेंढक का उत्सर्जन अंग वृक्क तथा उसकी त्वचा होती हैं।
10. पक्षी का उत्सर्जन अंग वृक्क होता है जिससे यूरिक अम्ल का उत्सर्जन होता है।
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